Scucess Story : पिता से पड़ी डांट ने दिलाया मुकाम, NDA का एग्जाम निकालकर गौरव बना लेफ्टिनेंट


शशिकांत ओझा/पलामू. आम तौर बच्चे पढ़ाई करने के लिए बाहर जाते हैं. मगर कुछ बच्चे ऐसे होते हैं जो माता पिता और परिवार से दूर जाए बिना पढ़ाई करना चाहते है. मगर ऐसा हो नहीं पाता. और घर छोड़कर बाहर पढ़ाई करने जाना पड़ता है. जिसके बाद वो होता है जो परिवार ने सपने में भी नही सोचे होते है. बचपन से ए ग्रेड ऑफिसर के सपना देखने वाले गौरव पांडे के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ है.

दरअसल, पलामू जिले के तरहसी प्रखंड के मंझिगावा बलियारी निवासी सुनील कुमार पांडेय के पुत्र गौरव कुमार ने लेफ्टिनेंट बन कर अपने परिवार का न रौशन किया है. गौरव कुमार ने महज 21 वर्ष और 6 महीने में इस पदवी को हासिल किया है. गौरव एक सामान्य परिवार से आते है. गौरव के पिता सुनील पांडे लेस्लीगंज के दारूडीह मध्य विद्यालय में शिक्षक के पद पर कार्यरत है. गौरव के घर में माता पिता के अलावा दो छोटी बहने है. जो इस सफलता को लेकर बेहद खुश है.

मिलिट्री स्कूल में पढ़ाई कर निकाला एनडीए
गौरव कुमार ने लोकल 18 को बताया की आठवीं क्लास में उनका नामांकन मिलिट्री स्कूल देहरादून में हो चुका था. इसके लिए वो झारखंड से 1 मात्र विद्यार्थी थे जो इस परीक्षा में सफल हुए थे. उन्होंने बताया की इसके लिए साल में दो बार परीक्षा आयोजित की जाती है. इसके बारे में उनके पिता के दोस्त ने अखबार में विज्ञापन देकर गौरव को परीक्षा में शामिल होने के लिए कहा था. जिसमे परीक्षा देकर गौरव सफल हुए. और गृह विभाग से उनके पिता सुनील पांडे को कॉल आया जिसके साक्षात्कार के आधार पर उनका नामांकन हुआ.यहां से एन डी ए का भी तैयारी कराया जाता है.

2022 में हुई थी पासिंग आउट परेड
वर्ष 2018 में एनडीए की परीक्षा में बैठे और पहले बार में सफल हुए. 2019 रिजल्ट आया जिसमे ऑल इंडिया रैंक 92 रहा. जहां इंटरव्यू में सफल होने के पश्चात एनडीए खड़कवासला पुणे में एडमिशन हुआ था. 3 वर्षों के कठिन प्रशिक्षण के बाद मई 2022 को इंडिया से पास आउट होकर इंडियन मिलट्री अकैडमी देहरादून में 1 वर्ष विभिन्न अस्त्र-शस्त्र संचालन का प्रशिक्षण लिया.

रात में पढ़ना गौरव को है पसंद
उन्होंने बताया कि रात के 9 बजे से सुबह 2:30 तक प्रतिदिन पढ़ाई करते थे. सुबह 8 बजे से परेड क्लास होता था तो 7 बजे उठना पढ़ता था. बहुत चुनौती भरी रही है सफर. वही एक दोस्त के साथ शेड्यूल बनाकर पढ़ाई करते थे. एक दूसरे के वीक प्वाइंट को दूर करने के लिए एक दूसरे का सहारा लेते थे. वही मिलिट्री स्कूल में जाने से पहले उनकी पढ़ाई एक सरकारी स्कूल से ही होती थी जहां पिता पढ़ाते थे. साथ ही मैथ साइंस की पढ़ाई भी पिता पढ़ाते थे.

इंग्लिश की पढ़ाई करने के लिए ट्यूशन जाते थे. अपने सफलता का श्रेय पूर्ण रूप से अपने माता पिता और अपनी बहनों को दिया है. उन्होंने बताया की. छुट्टी में घर आता था तो काफी सपोर्ट मिलता था. मां रात रात भर जागा करती थी. बहनें पूरा ध्यान देती थी. तभी मैं सफल हो पाया.

शिक्षक के बेटे गौरव ने मात्र 21 वर्ष 6 माह में यह उपलब्धि हासिल की है. वे वर्ष 2018 में इंडिया की लिखित परीक्षा में सफल हुए थे. उन्होंने अपनी कामयाबी का श्रेय कठिन मेहनत व गुरुजनों केमार्गदर्शन और परिवार के सहयोग को दिया है. गौरव के दादा भगवान पांडेय भी शिक्षक रह चुके हैं.

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Author: Jagran Times

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