USA Left UNESCO and now want to re-join know why china concerned

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हाल ही में अमेरिका ने संयुक्त राष्ट्र की संस्था यूनेस्को से फिर से जुड़ने की मंशा जताई है. यूनेस्को की डायरेक्टर जनरल ऑद्रे अजॉले ने जानकारी देते हुए कहा कि अमेरिका ने आधिकारिक तौर पर नोटिस दिया है कि वह यूनेस्को से जुलाई 2023 से फिर से जुड़ना चाहता है. एक दशक पहले अमेरिका ने इजराइल के साथ यूनेस्को को छोड़ दिया था क्योंकि यूनेस्को ने फिलिस्तीन को उसका सदस्य बनाने के लिए प्रस्ताव रखा था. लेकिन इस बार अमेरिका की वापसी पर चर्चा इजारइल फिलिस्तीन की नहीं बल्कि चीन की हो रही है. इस मामले में आखिर चीन और अमेरिका की क्या चिंताएं हैं?

यूनेस्को को फायदा
वहीं यूनेस्को और अन्य सदस्य देशो में अमेरिका की वापसी को लेकर खुशी है क्योंकि इससे संस्था को बहुत बड़ी आर्थिक सहायता मिलेगी. और यूनेस्को कई कार्यक्रम जिनमें जलवायु परिवर्तन से निपटने, महिला शिक्षा को प्रोत्साहित करने के कार्यक्रम शामिल हैं. अमेरिका को यूनेस्को छह करोड़ डॉलर देने हैं जो पिछले करीब एक दशक से चुकाए नहीं गए है.

अमेरिका की चिंता
बताया जा रहा है कि अमेरिका ने इस बार वापसी के साथ ही उसने बकाया देनदारी को चुकाने का इरादा भी जताया है लेकिन चीन का नाम भी लिया है. अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि वापसी का फैसला ही इस बात से प्रेरित है कि अमेरिका के संस्था छोड़ने से पैदा हुए खाली स्थान की चीन घेरने लगा था जिससे चिंतित हो कर अमेरिका ने वापसी का इरादा किया है.

चीन के असर से चिंता
अमेरिका को विशेष रूप से इस बात की चिंता है की चीन दुनिया भर में आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस और तकनीकी शिक्षा के लिए तय किए जा रहे मनकों और नीतियों को प्रभावित कर रहा है. अमेरिका के मैनेजमेंट एंड रिसोर्सेस के डिप्टी सेकेट्री ऑफ स्टेट रिचर्ड वर्मा ने यूनेस्को में वापसी की योजना पेश करते हुए देनदारी चुकाने पर भी बातचीत की.

Tags: China, Israel, Research, UNESCO, United nations, USA, World

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Up Head Line
Author: Up Head Line

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