
विक्रम कुमार झा/पूर्णिया. आपने अक्सर सुना होगा कि गोबर से लोग वर्मी खाद बनाते हैं. तो कई लोग गोबर से अपने घरों की लिपाई-पुताई करते हैं. लेकिन अब गोबर ब्रांड बन गया है. पूर्णिया गुलाबबाग की कुमारी बबीता ने पिछले चार महीनों से गोबर से राखी, मूर्ति सहित कई अन्य आकर्षक चीजें बनाती हैं. अपने आस पास एवं स्थानीय बाजारों में बेचती हैं.
इससे अच्छा मुनाफा भी कमा रही है.गोबर से राखी वअन्य चीजें खुद से बनाती हैं.स्थानीय महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनाने में लगी हैं.अभी लगभग 8 महिलाओं की टीम इनके पास है. इनको यह आइडिया पति से मिली.
घरों पर ही महिलाओं की टीम बनाती है गोबर से राखी
कुमारी बबीता कहती हैं वह पिछले 4 महीने से पूर्णिया में घर पर रहकर गोबर से राखी, मूर्ति सहित अन्य कई डेकोरेटिव चीजें बनाती हैं. साथ ही साथ अपने आस-पड़ोस की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए उन्हें रोजगार भी देने का काम कर रही हैंय इसकी चर्चा शहर में काफी जोरों पर है. उन्होंने बताया की मेरी टीम में अभी 8 महिलाएं काम कर रही हैं.
रोजाना सभी महिलाओं से 900 राखियांतैयार होती हैं
कुमारी बबीता ने बताया कीगो-पालक और किसान भाइयों से 1 रुपया प्रति किलो की दर से गोबर खरीदती हैं. रोजाना 1 क्विंटल गोबर खरीदारी करती हूं. वह कहती हैं कि यह राखी अकेले ही नहीं बल्कि और महिलाएं साथ मिलकर बनाती हैं. वहीं दिनभर में लगभग 800 से 900 राखी तैयार कर लेती हैं .जो अपने स्थानीय बाजारों में ही खुला बेचा जाता है. रक्षाबंधन पर्व आने की तैयारी को लेकर काम जोरों शोरों से चल रहा है. वही इस राखी की कीमत 20 रुपया से शुरू होकर अलग अलग रेंज और डिजाइन के उपलब्ध हैं.
इस तरह गोबर से बनाती हैं राखियां, मूर्ति बनाने की विधि
उन्होंने कहा कि गोबर से राखी बनाने का जो तरीका है, वह सबसे अलग हैं. पहले गोबर को मशीन में पिसाई करते हैं.उसेके बाद उन्हें सुखाती हैं. सुखाने के बाद गोबर को पाउडर बनाती हैं. उसके बाद उस पाउडर में वह मुल्तानी मिट्टी और मजबूती के लिए चूना मिलाकर उसे घंटों मसला जाता है. जिसके बाद उसे अच्छी तरह से मिलाने के बाद हल्के पानी डालकर आटा की तरह गूंथा जाता है.फिर उसे फर्मे या साँचे में डालकर छोड़ देती हैं. जिससे अलग-अलग मूर्ति सहित अन्य डेकोरेटिव चीजें बनाती है. उसके बाद महिलाएं कलर पेंटिंग कर उन्हें काफी आकर्षक बनाती हैं.
पति से मिला था आइडिया बनाई अपनी सोच
दरअसल, कुमारी बबीता कहती हैं उन्हें सुझाव पति भरत कुमार भगत से मिली. जिसके बाद अपने पति के सहयोग से छत्तीसगढ़ जाकर प्रशिक्षण कर वापस आने पर गोबर से राखी, मूर्ति सहित अन्य डेकोरेटिव चीजों को बनाना शुरू किया. महिलाओं को भी रोजगार देने का काम कर रही बबीता. कहती है अभी 8 महिलाओं की टीम है. आने वाले समय में हजारों महिलाओ को आत्मनिर्भर करुंगी.
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FIRST PUBLISHED : June 11, 2023, 22:55 IST






