काल सर्प दोष से मुक्ति के उपाय बता रहे हैं एमपी के ज्योतिषी, जानें अमावस्या तिथि पर नर्मदा स्नान का महत्त्व

दुर्गेश सिंह राजपूत/नर्मदापुरम. पूरे भारत में बहुत-सी पवित्र नदियां हैं. सभी नदियों का अपना अलग-अलग महत्त्व है. ऐसे ही मां नर्मदा हमारे देश की पवित्र नदियों में से एक मानी जाती है. पंडित घनश्याम शर्मा के मुताबिक, वाल्मीकि रामायण में कहा गया है कि इस नदी के तट पर राजा कार्तवीर्य अर्जुन ने रावण को हराया था. कहा जाता है कि नर्मदा में स्नान करने से परेशानियों के अतिरिक्त काल सर्प और गृह दोष दूर हो जाते हैं. मान्यता है कि किसी भी महीने की अमावस्या तिथि को नर्मदा नदी में स्नान करके चांदी से निर्मित नाग का संस्कार कर यहां विसर्जन करने से कुंडली का काल सर्प दोष शांत होता है और इसके दुष्प्रभाव भी कम होते हैं. बताते हैं कि मां नर्मदा में स्नान करने से जितने भी गृह दोष होते हैं, वे भी शांत हो जाते हैं. मां नर्मदा में स्नान करने से मंगल, शनि, राहु, केतु के दोषों से भी मुक्ति मिलती है.

पंडित घनश्याम शर्मा ने बताया कि शनिश्चरी अमावस्या के दिन नर्मदा के जल में स्नान करने से ऊपरी हवाओं से छुटकारा मिलता है. इस नदी की उत्पति भगवान शिव से हुई थी, जिसके कारण यह नदी आदिशक्ति की शक्तियों से पूर्ण है. कहा जाता है कि इसमें स्नान करने व दर्शन मात्र से सूर्य के समान तेज, चंद्र के समान सौम्यता, बुध के समान धैर्य और गुरु के समान धार्मिकता प्राप्त होती है. इसके साथ ही, स्नान करने से 7 जन्मों के पाप और दर्शन मात्र से 3 जन्मों के पापों से मुक्ति मिलती है.

नर्मदा नदी के विषय में यह भी कहा जाता है कि इसमें स्नान करने से दांपत्य जीवन में खुशहाली व शादी में आ रही रुकावटों का समाधान होता है. मां नर्मदा में स्नान करके गीले वस्त्रों में ही शिव-पार्वती का पूजन कर पार्वती जी को लगा सिंदूर स्त्री या पुरुष अपने माथे पर लगाएंगे तो विवाह संबंधी समस्या से मुक्ति भी मिल जाएगी. मां नर्मदा का जल पितरों के तर्पण के लिए भी पवित्र माना जाता है. यहां स्वयं भी पितरों का तर्पण कर सकते हैं. इसके लिए नदी में स्नान करके मां नर्मदा के जल से पितरों का तर्पण करना उनके लिए सुखदायक माना जाता है.

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Author: Jagran Times

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