भगवान ने इंसान को बनाया. उसे जिंदगी दी. जब इंसान अपनी जिंदगी जी लेता है तो मृत्यु आती है. मरने के बाद बॉडी को या तो जला दिया जाता है या फिर दफना दिया जाता है. जब लाश को दफन करते हैं तो वो वापस मिट्टी में मिल जाती है. जला देने पर बॉडी हवा में कई तत्वों में मिल जाती है. कहने का तात्पर्य यह है कि मरने के बाद इंसान का शरीर वापस प्रकृति में ही मिल जाता है. पुराने समय में लोगों को ये यकीन था कि मरने के बाद कुछ लोग वापस जिंदा हो जाते हैं. इस वजह से उनकी बॉडी पर प्रिजर्व करने का लेप लगाता जाता था.
हाल ही में मिसौरी में रहने वाली एक नन की बॉडी चार साल बाद निकली गई. इस नन की बॉडी पर कोई लेप नहीं लगाया गया था. इसके बाद भी जब चार साल बाद उसे बाहर निकाला गया तो वो बिलकुल खराब नहीं हुई थी. आमतौर पर इंसान की मौत के बाद अगर बॉडी को दफनाया ना जाए या जलाया ना जाए, तो थोड़े समय के बाद वो सड़ने लगती है. लेकिन इस नन साल पहले जिस हाल में दफनाई गई थी, उसी हाल में निकाली गई. इसकी वजह अभी तक सामने नहीं आई है.
ताबूत समेत निकाला बाहर
सिस्टर विल्हेल्मिना लंकास्टर की मौत मई 2019 में हुई थी. उनकी उम्र 95 साल थी. उनकी बॉडी को गोवेर में दफनाया गया था. चार साल के बाद एक परंपरा के तहत उनकी बॉडी को बाहर निकाला गया. इस दौरान बॉडी को ताबूत समेत निकाला जाता है. कोई भी बॉडी को नहीं देखता. लेकिन जब सिस्टर के ताबूत को निकाला गया तब उसमें एक क्रैक से दूसरी नन ने सिस्टर की बॉडी को देख लिया. उसने देखा कि बॉडी वैसी ही है जैसी चार साल पहले थी. उसमें सड़ने का कोई निशान नहीं था.
कहीं से नहीं सड़ी थी लाश
लोगों ने बताया चमत्कार
नन ने देखा कि सिस्टर विल्हेल्मिना के पैर बिलकुल वैसे हैं जैसे चार साल पहले थे. इसके बाद वो ख़ुशी से चीख पड़ी. उसके कहने पर ताबूत को खोला गया. लाश की स्थिति देखते ही सब हैरान रह गए. किसी को यकीन नहीं हुआ कि बिना किसी लेप के ही बॉडी बिलकुल वैसी है जैसी चार साल पहले थी. सिस्टर विल्हेल्मिना के चेहरे के आइब्रो, नाक, हिन्थ, बाल सब ठीक थे. उनके चेहरे पर स्माइल देखी जा सकती थी. इस चमत्कार के बाद सिस्टर विल्हेल्मिना की बॉडी को दर्शन के लिए चर्च में रख दिया गया. अब एक्सपर्ट इस बात का पता लगाने में जुट गए हैं कि ये चमत्कार कैसे हुआ?
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FIRST PUBLISHED : May 27, 2023, 16:26 IST









