
कुंदन कुमार/गया. गया-जहानाबाद जिला के सीमावर्ती क्षेत्र में बाबा कोटेश्वर नाथ धाम मंदिर अति प्राचीन होने के कारण काफी प्रसिद्ध है. इस धाम का गर्भ गृह लाल पत्थर के टुकड़े से बना है. यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ लगी रहती है. इस धाम पर दूर-दूर से लोग मंदिर की संरचना को देखने आते हैं.
दन्त कथा के अनुसार वाणासुर की बेटी उषा श्री कृष्ण के पोते से प्रेम करती थी. लेकिन वाणासुर श्री कृष्ण को दुश्मन मानता था. फिर उषा ने भगवान श्रीकृष्ण के पौत्र अनिरुद्ध को पाने के लिए इस मंदिर का निर्माण कराया था. इसके बाद श्री कृष्ण के पोते अनिरूद्ध से उषा की शादी भी हुई. उसके बाद से यहां पूजा करने की परंपरा शुरू हुई.
बाबा कोटेश्वरनाथ भगवान शिव के मंदिर के लिए प्रसिद्ध
बाबा कोटेश्वरनाथ मंदिर बेलागंज प्रखंड के मेन गांव में मोरहर और दरघा नदी के संगम पर स्थित है.बाबा कोटेश्वरनाथ भगवान शिव के मंदिर के लिए प्रसिद्ध है. माना जाता है कि कोटेश्वरनाथ मंदिर 5वीं शताब्दी के आसपास बनाया गया था. कोटेश्वरनाथ मंदिर का गर्भ गृह पत्थरों के लाल टुकड़ों में बना है. इसके भीतर द्वापर युग में निर्मित 1008 लघु शिवलिंग से समाहित एक बड़े आकार के शिवलिंग की स्थापना की गई थी.
1008 लघु शिवलिंग से समाहित एक बड़े आकार का है शिवलिंग
कहा जाता है उषा अनिरुद्ध से शादी की मनोकामना के लिए भगवान शिव की पूजा करने के लिए मंदिर गई थी. पूजा के दौरान भगवान शिव प्रकट हुए और उन्हें अपनी इच्छा पूरी करने के लिए एक हजार शिवलिंग स्थापित करने के लिए कहा. उसके बाद उषा ने यहां 1008 लघु शिवलिंग से समाहित एक बड़े आकार के शिवलिंग की स्थापना की. इसके परिणामस्वरूप भगवान शिव ने उषा को वरदान दिया जिसके बाद उषा को भगवान कृष्ण के पोते अनिरुद्ध से विवाह हुआ.
सावन के महीने में यहां पूजा पाठ करने का विशेष महत्व
मंदिर के पुजारी अजीत तिवारी ने बताया कि भगवान शिव का यह मंदिर काफी पुराना है. जो लोग भी यहां पूजा करने आते हैं. उनकी प्रत्येक मनोकामना पूरी होती है. यहां सालों भर श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रहती है. दूर दूर से यहां लोग पहुंचते है और उनकी मनोकामना पूर्ण होती है. सावन के महीने में यहां पूजा पाठ करने का विशेष महत्व है. सावन के महीने में भक्त बहुत आते हैं. भगवान शिव की आराधना करते हैं. भगवान शिव भी भक्तों को सुख, समृद्धि और शांति प्रदान करते हैं.
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FIRST PUBLISHED : May 14, 2023, 07:26 IST








