Tiger t 104 alias cheenu died under mysterious circumstances at sajjangarh biological park who is responsible for this great loss

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जयपुर. रणथम्भौर से मंगलवार रात को सज्जनगढ़ बॉयोलोजिकल पार्क लाया गया टाइगर टी-104 उर्फ चीनू शिफ्टिंग के महज़ 12 घंटे में ही इस दुनिया को अलविदा कह गया. सूत्रों का कहना है कि टाइगर की मौत रात में ही हो गई थी. वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि टाइगर की मौत का पता सुबह चला. टाइगर की मौत के बाद वन विभाग की ओर से मई की तेज़ गर्मी में दिन के समय टाइगर शिफ्टिंग पर भी सवाल उठने लगे हैं. रणथम्भौर से बाघ टी-104 को मंगलवार सुबह 8 बजे रणथम्भौर से लेकर टीम रवाना हुई थी. करीब 12 घंटे के सफर के बाद रात 9.11बजे इसे टी-24 के एनक्लोजर में छोड़ा गया था. उसके बाद बाघ रात को यहां पानी के छोटे तालाब में भी बैठा था. इसके बाद एक जगह जाकर सो गया. उसके बाद यह फिर से नहीं उठा.

टाइगर टी-104 को शिफ्ट करने की वन विभाग की कार्य प्रणली पर सवाल खड़े हो रहे हैं. टाइगर को बेहोश करने में कितना डोज़ इस्तेमाल में किया गया, उसे कितनी बार बेहोश किया गया और उसे जिस गाड़ी में शिफ्ट किया गया उसका AC काम कर रहा था या नहीं आदि को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं. अहम सवाल यह भी है कि उदयपुर में टाइगर को रिलीज़ किया गया तो उस दौरान उसका मेडिकल मुआयना किया गया था या नहीं. इस जंगली बाघ को तीन इंसानों को मौत के घाट उतारने के कारण पिछले साढ़े तीन साल से कैद किया गया था. बाघ की जंगली प्रवृत्ति बनी रहे इसके लिए उसे रणथंभौर के ही भिड़ नाके में बने एनक्लोजर में रखा गया था. ऐसे में अचानक विभाग को ऐसी क्या जल्दबाज़ी थी कि उसे मई की तेज गर्मी के दौरान 500 किलोमीटर का 12 घंटे का सफर सड़क मार्ग से करवाया गया? इस बाघ को न तो इतने छोटे पिंजरे में कैद होने की आदत थी और न ही इतना लंबा सफर करने का वह अभ्‍यस्‍त था. अब नतीजा सबके सामने है.

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बहुत कुछ कहता है टाइगर का शव
बहरहाल, टाइगर टी-104 का बुधवार दोपहर बाद तकरीबन 1 बजे बायोलॉजिकल पार्क में ही पोस्‍टमॉर्टम किया गया. दोपहर 3 बजे तक मामले में गठित किये गए मेडिकल बोर्ड ने इसका पोस्टमॉर्टम किया. इसके बाद चार बजे उसके शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया. इस दौरान वन विभाग ने सब कुछ बेहद गोपनीय ढंग से किया. टाइगर की शिफ्टिंग की भनक किसी को नहीं लगने दी गई और अब उसकी मौत के बाद किसी को पोस्टमॉर्टम की कोई पुख्ता जानकारी भी नहीं दी गई. हालांकि, पोस्टमॉर्टम करने वाले चिकित्सकों ने प्रारंभिक जांच में लिवर और लंग्स में इंस्फेक्शन की आशंका व्यक्त की है, लेकिन उससे बाघ की अचानक मौत होना सम्भव नहीं है. मौत का कारण बेहोशी के इंजेक्शन का ओवरडोज़ या हीट स्ट्रोक के करना हार्ट फेल्योर भी हो सकता है, क्योंकि जिस हिसाब से टाइगर का जबड़ा भिंचा हुआ था उससे ऐसा ही लगता है. हालांकि, इसका खुलासा विसरा सैम्पल्स की विस्तृत जांच रिपोर्ट में ही सामने आएगा.

जांच रिपोर्ट नहीं देता वन विभाग
प्रदेशभर में वन्यजीव प्रेमी रणथंभौर से उदयपुर के सज्जनगढ़ वन्य जीव अभयारण्य में शिफ्ट किए गए बाघ टी-104 की मृत्यु की खबर से दुखी हैं. राजस्थान लघु उद्योग विकास निगम के चेयरमैन राजीव अरोड़ा ने ट्वीट कर कहा है कि भीषण गर्मी में बाघ को दिन के समय अपने स्थान से करीब 700 किलोमीटर दूर बंद गाड़ी से शिफ्ट कर लापरवाही की गई. इसके साथ ही ट्रैंकुलाइजर के ओवरडोज की सच्‍चाई भी सामने आनी चाहिए. इसी महीने मुकुंदरा में गर्भवती बाघिन एमटी-4 को भी दो दिन में दो बार गैर जिम्मेदार और अवैज्ञानिक रवैये के साथ ट्रैंकुलाइज किया गया था, जिसके चलते बाघिन एमटी-4 की मौत हो गई थी. उन्होंने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और प्रदेश के वन एवं पर्यावरण मंत्री हेमाराम चौधरी से संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है. दो साल पहले बाघ T-75 को रणथंभौर से सारिस्का शिफ्ट किया गया था. वहां उसे ST-16 नाम दिया गया था. बताया जाता है कि उसकी मौत भी बेहोशी के ओवरडोज़ से हुई थी, लेकिन उस मामले में भी आज तक जांच लंबित है. ऐसे में इस मामले का नतीजा कब सामने आएगा कहना मुश्किल है.

Tags: Jaipur news, Rajasthan news, Udaipur news, Wildlife Conservation in India

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Author: Up Head Line

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