कौशाम्बी। मंझनपुर तहसील में प्रशासनिक और न्यायिक कार्यप्रणाली को लेकर अधिवक्ताओं में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। अधिवक्ता वेलफेयर एसोसिएशन तहसील मंझनपुर की आवश्यक बैठक में उपजिलाधिकारी मंझनपुर और नायब तहसीलदार मंझनपुर/करारी के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए उनकी अदालतों के बहिष्कार का बड़ा फैसला लिया गया है।
एसोसिएशन की बैठक में 10 सूत्रीय समस्याओं पर चर्चा हुई। अधिवक्ताओं ने आरोप लगाया कि पुनर्स्थापन प्रार्थना पत्रों को दर्ज नहीं किया जा रहा, जनता दर्शन में शिकायतों का सही निस्तारण नहीं होता और वादकारियों को परेशान किया जाता है। इसके अलावा राजस्व की धारा 76 और 80 के मामलों में मनमानी, मुकदमों की पत्रावलियों के दायरे में देरी तथा बहस के बाद महीनों तक आदेश पारित नहीं होने जैसे गंभीर मुद्दे उठाए गए। बैठक में नायब तहसीलदार मंझनपुर/करारी अतुल वर्मा के व्यवहार और कार्यप्रणाली पर भी अधिवक्ताओं ने नाराजगी जताई। अधिवक्ताओं का कहना है कि मुकदमों का निस्तारण तकनीकी आधार पर करने के बजाय गुण-दोष के आधार पर किया जाना चाहिए। बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि जब तक इन समस्याओं का समाधान नहीं होता, तब तक अधिवक्तागण एसडीएम मंझनपुर और नायब तहसीलदार मंझनपुर/करारी की अदालतों में न्यायिक कार्यों से विरत रहेंगे।
इस फैसले के बाद तहसील प्रशासन और अधिवक्ताओं के बीच टकराव बढ़ने के आसार हैं। अब देखना होगा कि अधिवक्ताओं की नाराजगी दूर करने के लिए प्रशासन की ओर से क्या कदम उठाए जाते हैं।








