
राहुल मनोहर/ सीकर. जिले के डांसरोली गांव में एक ऐसी गौशाला है जहां हर महीने लाखों रुपए का दान आता है. इस गौशाला में अब तक करोड़ों का दान आ चुका है. इन पैसों से गोपालक गायों के रखरखाव की उचित व्यवस्था करते हैं. इस गौशाला के रखरखाव का मॉडल संपूर्ण राजस्थान में अपनाया जाता है. गायों के रखरखाव मैं यहां हाईटेक टेक्नोलॉजी का उपयोग किया जाता है. हर दो दिन से डॉक्टर गायों की आकर जांच करता है और बीमार गायों को दवाइयां देता है.
उपाध्यक्ष भंवरलाल परसवाल ने बताया कि खेत में गायों द्वारा फसल नष्ट करने की समस्या से निजात पाने के लिए 2002 में कुछ गायों के साथ गौशाला की स्थापना की गई थी. जिसमें आवारा गायों को रखा जाता था. अब जून 2023 तक गौशाला के पास 400 से ज्यादा गायें है. अब गौशाला में गायों के रखरखाव में भामाशाह , उद्योगपति और आम लोगों ने भी रुचि लेना शुरू कर दिया है. जानकारी के अनुसार अब तक इस गौशाला को एक करोड़ से भी ज्यादा का दान आ चुका है. हर महीने गाय प्रेमी और उद्योगपति गायों के रखरखाव के लिए लाखों का दान देकर जाते हैं और स्थानीय ग्रामीण गौशाला में पहुंचकर गायों की सेवा करते हैं.
गायों के लिए की गई यह व्यवस्था
डांसरोली स्थित इस कामधेनु गौशाला में गायों के लिए तीन बड़े आवासीय गोदाम बनाए गए हैं जिसमें छोटी गायों के लिए 150 × 36 वर्ग फीट का आवास गृह, बड़ी गायों के लिए 120 × 36 वर्ग फीट का आवास गृह व चोटिल और गर्भवती गायों के लिए 150 × 51 वर्ग फीट का आवास गृह बनाया गया है. चारा रखने के लिए 111 × 51 वर्ग फीट का चारा गोदाम भी बनाया गया है. गायों के पानी पीने के लिए 60 फीट लंबी और 20 फीट जोड़ी अनेकों टंकिया बनाई गई है. गायों के चारा खाने के लिए अनेकों चारा पात्र रखे हुए हैं.
गौशाला को हर महीने आता है लाखों का दान
जानकारी के अनुसार 2021-22 में गौशाला को 39 लाख रुपए का दान मिला था. जिसमें 18 लाख रुपए राज्य सरकार ने 18 लाख रुपए भामाशाहो ने व 3 लाख रुपए गोबर के खाद से मिले. गोपालक के अनुसार गौशाला में प्रतिदिन बड़ी गाय पर 60 रूपए व छोटी गाय पर 30 रूपए खर्च होते हैं. लगभग 20 लाख रुपए का गायों के लिए चारा खरीदा जाता है. 1 लाख में सालाना मीठे पानी की व्यवस्था की जाती है.
जिले में गायों के रखरखाव व्यवस्था में सबसे टॉप पर कामधेनु गौशाला
डांसरोली गांव में स्थित श्री कामधेनु गौशाला गायों के रखरखाव में सबसे टॉप पर है. इस गौशाला को केंद्र व राज्य सरकार द्वारा भी मदद दी जाती है. इस गौशाला में 51 सदस्य की कमेटी बनाई गई है जो संपूर्ण गौशाला का आय का ब्यौरा रखते हैं. प्रत्येक माह की 20 तारीख को वह आय व्यय का ब्यौरा सदस्य को दिया जाता है. इसके रखरखाव के कारण व भामाशाह व व्यवसाय के दान के कारण दूर-दूर के गोपालक यहां आकर कामधेनु गौशाला के मॉडल को अपनाते हैं.
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FIRST PUBLISHED : June 16, 2023, 16:05 IST






