
नई दिल्ली: तमिलनाडु के मंत्री वी. सेंथिल बालाजी की गिरफ्तारी के बाद एक बार फिर से प्रवर्तन निदेशालय (ED) विवादों में घिर गया है. वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री से 18 घंटे पूछताछ करने के बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया. जिसके बाद काफी ड्रामा हुआ क्योंकि उन्हें कथित तौर पर कार्डियक अरेस्ट हुआ था. जबकि गिरफ्तारी से संबंधित सुनवाई मद्रास उच्च न्यायालय में चल रही है. मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन ने भाजपा को डीएमके के साथ नहीं उलझने की चेतानवी दी है. बालाजी भी उन प्रभावशाली लोगों में से एक हैं, 2019 के बाद जिनकी गिरफ्तारी हुई है.
2019 के बाद से ईडी की गिरफ्तारियां
न्यूज 18 ने जब ईडी के रिकॉर्ड की जांच की तो पाया कि 2019 के बाद से प्रवर्तन निदेशालय ने जो गिरफ्तारी की उसमें, एक दर्जन वरिष्ठ नौकरशाह, जिनमें आठ IAS अधिकारी, एक IPS अधिकारी, एक IRS अधिकारी शामिल हैं. उनके सहित विपक्षी दलों के 15 वरिष्ठ राजनेता – पूर्व केंद्रीय वित्त और गृह मंत्री पी. चिदंबरम, जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला, दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया, छह मंत्रियों (विभिन्न राज्यों के), एक प्रभावशाली सांसद, सहित लंबी सूची है.
शीर्ष ईडी अधिकारी ने बताया है कि जिन 726 मामलों में केंद्रीय एजेंसी जांच कर रही है उनमें से 181 मामले राजनेताओं से जुड़े हुए हैं. अधिकारी ने बताया कि 191 अहम मामले जिनमें बड़े घोटाले, राजनीतिक या नौकरशाही भ्रष्टाचार या बैंक धोखाधड़ी या मनी लॉन्ड्रिंग है, उनकी सुनवाई जारी है.
गिरफ्तारी के अलावा ईडी ने कम से कम 115 वरिष्ठ राजनीतिज्ञों और करीब दो दर्जन आईएएस, आईआरएस आईपीएस अधिकारियों से पूछताछ की और उन्हें समन जारी किया और छापेमारी की. जिन नौकरशाहों की जांच चल रही है उनमें 8 आईपीएस अधिकारी, बंगाल से तीन वरिष्ठ आईएएस अधिकारी जो कोयला, मवेशी और रोजगार घोटाले से जुड़े है, चार आईआरएस अधिकारी आयकर अधिकारी और झारखंड के कम से कम 5 अधिकारी जो कोयला घोटाले से जुड़े हुए हैं.
2014 से पहले कौन ईडी… और बाद में बाप रे… ईडी
ईडी जिसे 2014 से पहले कोई ठीक से जानता तक नहीं था, अब भारत की सबसे उग्र केंद्रीय कानून प्रवर्तन और जांच एजेंसी बन गई है, जिसके पास व्यापक शक्ति मौजूद है. वर्तमान निदेशक, संजय मिश्रा के तहत एजेंसी भारत के बड़े भ्रष्टाचार और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों की जांच कर रही है. संजय मिश्रा, 2013 में जब चिदंबरम वित्त मंत्री थे उस दौरान वित्त मंत्रालय में वरिष्ठ पद पर थे. इसके बाद वह गृह मंत्रालय में चले गए थे. हालांकि 2019 में मिश्रा की बतौर निदेशक नियुक्ति के बाद चिदंबरम को मनी लॉन्ड्रिंग और भ्रष्टाचार के मामले को लेकर गिरफ्तार किया गया था, उसके बाद कई नेताओं को हिरासत में लिया गया.
ईडी में उनके सहयोगी बताते हैं कि मिश्रा एकांत पसंद करने वाले अधिकारी हैं जो किसी भी नेता या आरोपी से मिलते नहीं हैं और आंतरिक बैठकों के दौरान भ्रष्टाचार के लिए तेजी से जांच और जीरो टोलरेंस पर जोर देते हैं. निदेशक के तौर पर इनका कार्यकाल केंद्र सरकार तीन बार बढ़ा चुकी है और अब इनका तीसरा कार्यकाल नवंबर में समाप्त होना है.
तमाम सरकारों के दौरान सीबीआई को विपक्षी दलों ने- कांग्रेस ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन से लेकर भाजपा ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन और पिंजरे का तोता सहित तमाम नामों से बुलाया जा चुका है, लेकिन अब ईडी को मोदी की नई सीबीआई कहा जा रहा है.
राजनेता, नीति निर्माता और भ्रष्टाचार
राष्ट्रीय सुरक्षा मामलों के अलावा, ईडी राज्य भर में बड़े भ्रष्टाचार मामलों की जांच कर रही है. इनमें छत्तीसगढ़ में शराब घोटाला, अवैध कोयला और खनन मामला, दिल्ली में आबकारी अनियमितता का मामला, झारखंड में कोयला और खनन मामला, पश्चिम बंगाल में कोयला, मवेशी, शिक्षक भर्ती और नगरनिगम कर्मचारी भर्ती घोटाला, बिहार में भूमि और रोजगार घोटाला शामिल है. वरिष्ठ आईएस अधिकारियों को झारखंड खनन लीज मामले में, छत्तीसगढ़ कोयला लेवी मामले में और केरल में सोने की तस्करी से जुड़े मामले में हिरासत में लिया जा चुका है.
हालांकि विपक्ष के नेताओं ने भाजपा पर आरोप लगाया है कि ईडी केवल उन राज्यों में कार्रवाई कर रही है जहां विपक्ष की सरकार है. एक वरिष्ठ ईडी अधिकारी ने न्यूज 18 से कहते हैं, ‘ईडी को राजनीति से प्रेरित बताने वाले नेताओं के खिलाफ सबूत और एफआईआर दर्ज हैं. कई मामले अब सुनवाई के चरण में हैं, क्या वे मामलों और सबूतों से इनकार कर सकते हैं? हमारा राजनीति से कोई लेना-देना नहीं है और कोई राजनेता हमसे बात नहीं करता है. कानून बस अपना काम कर रहा है.’
ईडी को कहां से मिल रही है ताकत
केंद्रीय जांच ब्यूरो से इतर ईडी एक बहु विषयक संस्थान है जो भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) और दंड प्रक्रिया संहिता से बाध्य नहीं है. एजेंसी को विभिन्न कानूनों के प्रवर्तन प्रदान किए गए हैं. इसे धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) 2002 से शक्ति हासिल होती है. इसके पास विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम 1999 के तहत विनिमय नियंत्रण कानून के उल्लघंन की जांच करने के लिए अर्धन्यायिक शक्तियां हैं. इसके साथ ही कानून और नियम के अनुसार दोषी पाए जाने वालों पर जुर्माना लगाने का भी अधिकार होता है.
2013 में आखिरी संशोधन के साथ, PMLA देश में सबसे मजबूत कानूनों में से एक के रूप में उभरा था. 2018 में, सरकार ने भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम, 2018 पारित करके ईडी को और भी शक्तिशाली बना दिया, यह कानून एजेंसी ने 21 अप्रैल, 2018 से लागू किया. कम से कम 130 ऐसे विधेय अपराध हैं जिनकी ईडी जांच कर सकती है. सीबीआई से इतर इसे जांच के लिए केंद्र या किसी राज्य की सिफारिश या अदालत के निर्देश की ज़रूरत नहीं होती है. एफआईआर होने पर यह किसी भी मामले की जांच कर सकती है. यह एजेंसी वित्त मंत्रालय के अधीन कार्य करती है.
अपने बनाए कानून में ही फंसे चिदंबरम
गौरतलब है कि 17 दिसंबर, 2012 को राज्यसभा में धन शोधन निवारण (संशोधन) विधेयक, 2012 को पेश करते हुए, तात्कालीन वित्त मंत्री चिदंबरम ने पीएमएलए को मजबूत करने पर भाषण दिया था और धन शोधन और विधेय अपराध की अवधारणा को समझाया था. उन्होंने कहा था, सबसे पहले हमें यह याद रखना चाहिए कि मनी लॉन्ड्रिंग एक बहुत तकनीकी रूप से परिभाषित है. इसे वैसे नहीं समझना चाहिए जैसा हम आम बोलचाल की भाषा में मनी लॉन्ड्रिंग को समझते हैं. तकनीकी परिभाषा से यह खुद ही साबित हो जाता है कि यह एक विधेय अपराध होना चाहिए, और इससे वैसे ही निपटना चाहिए जैसे किसी भी अपराध के मामलों से निपटा जाता है.
यह महज काले धन को सफेद या सफेद को काला करने जैसा सरल मामला नहीं है. वह तो आयकर के तहत एक अपराध होता है. इसे अनूसूची में परिभाषित अपराध होना चाहिए. और कोई भी जो प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से अपराध की आय से जुड़ी किसी भी प्रक्रिया या गतिविधि में शामिल होता है या सहायता करता है या शामिल होता है और इसे बेदाग संपत्ति के रूप में पेश करता है, वह मनी लॉन्ड्रिंग के अपराध का दोषी है, तो, यह एक बहुत ही तकनीकी अपराध है. विधेय अपराध सभी अनुसूची में सूचीबद्ध है. जब तक कोई विधेय अपराध न हो, तब तक मनी लॉन्ड्रिंग का अपराध नहीं हो सकता है. अपने इस भाषण के 5 साल बाद, 2019 में, चिदंबरम को ईडी ने इसी कानून के तहत गिरफ्तार किया था.
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Tags: Enforcement directorate, National Investigation Agency
FIRST PUBLISHED : June 16, 2023, 14:54 IST






