
अखंड प्रताप सिंह /कानपुरः राष्ट्रीय शर्करा संस्थान में एक नई तकनीक ईजाद की है. जिससे गन्ना किसानों को बेहद फायदा होगा. अब गन्ना किसान अपनी फसलों में गन्ने के साथ हैदराबाद की मीठी ज्वार को भी उगा सकेंगे. यह तकनीक तैयार करने में संस्थान के वैज्ञानिकों को 5 साल का वक्त लगा है. जानिए क्या है यह तकनीक और किस तरह करती है काम.
राष्ट्रीय शर्करा संस्थान लगातार देश में गन्ना उत्पादन और गन्ना किसानों के लिए नई नई तकनीकी इजाज कर काम करता है.इसी क्रम में बीते 5 सालों से राष्ट्रीय शर्करा संस्थान शोध कर रहा था. जिस पर अब उसे सफलता प्राप्त हुई है. एनएसआई के वैज्ञानिकों को भारतीय कदन्न अनुसंधान संस्थान हैदराबाद से मीठी ज्वार की 5 प्रजातियां csh22ss, ss74,ss84,फूले वसुंधरा, icssh28 मिली थी. जिसके बाद एनएसआई के वैज्ञानिकों ने इन दोनों प्रजातियों को बलरामपुर शुगर मिल्स और डालमिया भारत सुगर मिनट में तैयार कराया है.
किसानों के ये में होगी 35 प्रतिशत की वृद्धि
5 साल बाद इनके रोचक परिणाम सामने आए हैं. यह फसलें लहलहा गई है जिसके बाद वैज्ञानिकों का दावा है कि अगर किसान इस फसल को तैयार करेंगे, तो उनकी आय में करीब 35% की वृद्धि होगी.इसके अलावा 30% तक एथेनॉल भी इससे तैयार किया जा सकेगा. गन्ना किसान अपने खेतों में गन्ने की फसल के साथ मीठी ज्वार को भी उठा सकेंगे. किसानों को गन्ने की दो कतारों के बीच में इसे लगाना होगा
शोध से मिला सार्थक परिणाम
राष्ट्रीय शर्करा संस्थान के निदेशक प्रोफेसर नरेंद्र मोहन ने बताया कि पहली बार कैंपस में चुकंदर की फसल को उगाया गया है. जिसके परिणाम बेहद सार्थक सामने आए हैं. इसके साथ ही उन्होंने बताया कि गन्ना किसान हैदराबाद भी मीठी ज्वार उठाकर भी बेहद फायदा पा सकते हैं. कई साल चले शोध में संस्थान को सफलता प्राप्त हुई है. अब किसानों को इसके प्रति जागरूक किया जाएगा.
.
FIRST PUBLISHED : May 27, 2023, 13:10 IST









