
पीयूष पाठक/अलवर. वैसे तो आपको शनि मंदिर हर जिले व राज्य में देखने को मिलेंगे. लेकिन आज हम आपको ऐसे मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं. जो करीब 200 साल पुराना है. अलवर शहर का शनि मंदिर. सभी शनि मंदिरों से अपने आपको अलग बनाता है. वैसे तो अलवर शहर के मनी का बड़ स्थित शनि मंदिर की मूर्ति की बहुत सी अलग विशेषताएं हैं. इस मंदिर के दर्शन करने के लिए लोग दूर-दूर से आते हैं और मनोकामनाएं मांगते हैं. इस शनि मंदिर में शनिदेव भैंसे पर सवार हैं. इस मंदिर की प्रतिमा पहाड़ों से निकली हुई बताई जाती है.
200 साल पहले बना था मंदिर
शनि मंदिर के महंत पंडित शिवकुमार शर्मा ने बताया कि अलवर में स्थित यह मंदिर करीब 200 साल पुराना है. यह मंदिर उस समय के महाराजा जय सिंह जी के समय का है. शनि मंदिर हमारे दादा छगनलाल जी द्वारा स्थापित किया हुआ है. इस मंदिर में स्थापित शनिदेव की प्रतिमा की विशेषता यह है, कि यहां पर शनि देव भैंसे पर सवार हैं.
शनिदेव प्रतिमा के हैं 3 नेत्र
प्रतिमा के चारों हाथ है. इनकी खास विशेषता जो इन्हें सभी मूर्तियों से अलग बनाती है कि इस प्रतिमा में शनिदेव के तीन नेत्र हैं. जैसे भगवान शिव के तीन नेत्र हैं, वैसे ही यहां पर स्थापित शनि देव के भी तीन नेत्र हैं. दो नेत्र आगे व एक नेत्र मस्तिष्क पर पीछे है. यहां पर दूर-दूर से भक्त भगवान के दर्शन करने के लिए आते हैं और अपनी मनोकामना पूर्ण होने की कामना करते हैं.
पंडित शिवकुमार शर्मा ने बताया कि यहां पर स्थापित शनिदेव की मूर्ति काले पत्थर से निर्मित है. यह मूर्ति पहाड़ों से निकली हुई मूर्ति बताई जाती है. यह अपने आप में इस प्रतिमा की खास विशेषता है. पहाड़ों से निकली हुई प्रतिमा को मेरे दादाजी ने यहां लाकर स्थापित किया. जो आज करीब 200 सालों से यहां स्थापित है. यह मंदिर लोगों की आस्था का केंद्र है.
दूर दूर से आते है भक्त
शिवकुमार शर्मा के अनुसार यहां पर भक्त शनिदेव का आशीर्वाद लेने के लिए दिल्ली, जयपुर, गुड़गांव व आसपास के अन्य राज्यों व शहरों से भी आते हैं. एक बार जो भक्त यहां से अपनी मनोकामना मांग कर जाता है. वह पूरी होने के बाद वापस यहां पर आकर जरूर धोक लगाता है औरहमारे साथ जुड़ जाता है.
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FIRST PUBLISHED : May 27, 2023, 13:02 IST









