
मो.महमूद आलम/नालंदा. बिहार के नालंदा जिला मुख्यालय बिहारशरीफ से 20 किलोमीटर दूर स्थित चंडी प्रखंड में राज्य का इकलौता सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर वेजिटेबल है. यहां इजराइली तकनीक पर आधारित हाइड्रोपोनिक यूनिट की शुरुआत की गई है. यहां बिना मिट्टी के पत्तेदार सब्जियों की खेती की शुरुआत की गई है. यह सरकारी स्तर पर लगाई गई है जो पानी की यूनिट की शुरुआत में पत्तेदार सब्जियों के पौधे लगाए गए हैं. जल्द ही यहां अन्य वैरायटी के पौधे भी लगाए जाएंगे.
यहां तैयार उत्पाद की ब्रांडिंग की जाएगी जिसे देश की बड़ी मंडियों तक पहुंचाया जाएगा. इससे आय का स्रोत बढ़ेगा. खास बात है कि हाइड्रोपोनिक तकनीक की खेती की बारीकियां सूबे के किसानों को यहां लाकर सिखाया भी जाएगा. इतना ही नहीं, कैंपस में एयरोपोनिक यूनिट भी लगाई जा रही है, जिसे एक से डेढ़ माह में तैयार कर लिया जाएगा. इसकी खासियत है कि इसमें बिना मिट्टी के हवा में बीमारी रहित आलू के बीज तैयार होंगे. किसानों को अनुदान पर बीज दिया जाएगा. हाइड्रोपोनिक यूनिट 1,000 वर्ग मीटर में बनाया गया है, जबकि 1,800 वर्ग मीटर यूनिट में एरोपॉनिक यूनिट बनकर तैयार हो जाएगा. दोनों की लागत करीब पांच करोड़ रुपया है.
हाइड्रोपोनिक यूनिट में 5 वेरायटी के लगे पौधे
इस संबंध में प्रोजेक्ट के अफसर सीईओ चंडी डॉ. अभय कुमार गौरव ने बताया कि हाइड्रोपोनिक यूनिट में पांच वेरायटी के पौधे लगाए गए हैं, जो 30 से 40 दिन में तैयार हो जाएगा. इसके बाद उपज मिलने लगेगी. बेसिल, धनिया, केला व पाकचोयि मल्टी क्रॉप है. ढाई से तीन सप्ताह के अंतराल पर इसकी कटाई की जाएगी. तीन से चार माह तक उपज मिलेगी, जबकि लेट्यूस सिंगल क्रॉप है, इसकी एक बार कटाई होगी सारी वेरायटी सलाद बनाने के काम आती है.
इस विधि में मिट्टी की जरूरत नहीं पड़ती है. पानी में बालू या कंकड़ डालकर पौधे लगाए जाते हैं. पौधों को पोषक तत्व देने के लिए विशेष तरह का घोल इस्तेमाल होता है. इस घोल में नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटाश, मैग्निशियम, कैलशियम, सल्फर, जिंक, आयरन को एक खास अनुपात में मिलाया जाता है. ऑक्सीजन को पंपिंग मशीन के जरिए पौधे की जड़ों तक पहुंचाया जाता है. इनमें बीमारियां कम लगती है. इस वजह से कीटनाशकों की जरूरत नहीं पड़ती है.
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FIRST PUBLISHED : May 27, 2023, 07:45 IST









