Kalashtami 2023: भगवान शिव के रुद्रावतार बाबा भैरव का करें जाप, हर लेंगे सारे कष्ट, पढ़ें पूजा का महत्व और कथा

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हाइलाइट्स

धतूरा, दूध, दही, बेलपत्र, धूप, दीप, फल, फूल अर्पित करने से काल भैरव खुश होते हैं.
बाबा काल भैरव की पूजा करने से असाध्य रोग समाप्त होते हैं.

Jyesth Kalashtami 2023: इस बार कालाष्टमी 12 मई 2023 को मनाई जा रही है. इस दिन श्रद्धालु पूरे विधि-विधान से भगवान शिव के रुद्रावतार बाबा भैरवनाथ की पूजा करते हैं. हिन्दू पंचांग के अनुसार, कालाष्टमी का व्रत प्रत्येक हिंदी माह कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रखा जाता है. भैरवनाथ की पूजा और उनका जाप करने से भक्तों का कल्याण होता है. इसके साथ ही भय, दुख, कष्ट, पाप और नकारात्मकता समाप्त होती है. बाबा भैरवनाथ को काशी का कोतवाल भी कहा जाता है. मान्यता है कि काशी में बाबा विश्वनाथ के दर्शन करने जाएं और बाबा भैरव की पूजा नहीं की तो दर्शन करने का कोई लाभ प्राप्त नहीं होगा. कुछ ऐसी ही मान्यता मां वैष्णों देवी के दर्शन से जुड़ी है. आइए उन्नाव के ज्योतिषाचार्य पंडित ऋषिकांत मिश्र से जानते हैं कालाष्टमी पूजा का महत्व और व्रत कथा के बारे में.

कालाष्टमी व्रत कथा

पौराणिक कथा के अनुसार, यह बात कुछ उस समय की है, जब त्रिदेव यानी ब्रह्मा, विष्णु और महेश में ‘श्रेष्ठ कौन’ को लेकर मंथन हुआ. यह विचार मंथन इतना बढ़ गया कि बैठक बुलानी पड़ गई. इस विचार मंथन की बैठक में सभी देवजनों का पदार्पण हुआ. मुद्दे के अनुसार बात को रखा गया कि आखिर तीनों में श्रेष्ठ कौन? इस पर सभी देवजनों ने अपने-अपने विचार व्यक्त किए और उत्तर को खोजा गया. इन उत्तर का भगवान शिव और विष्णु ने समर्थन किया, किन्तु ब्रह्मा जी ने शिव को अपशब्द कह दिए. इन शब्दों से क्रोध में आकर भगवान शिव ने अपने रूप भैरव को जन्म दिया. इस दौरान भैरव ने अपना क्रोध दिखाते हुए ब्रह्मा जी के एक सिर को काट दिया. तब से ब्रह्मा जी के पास 4 मुख ही बचे हैं.

बाबा भैरव पर ब्रह्महत्या का दोष

बता दें कि बाबा भैरव के हाथ में छड़ी है और उनका वाहन काला कुत्ता है. इस अवतार को महाकालेश्वर के नाम से भी जाना जाता है. जब भगवान शिव ने भैरव रूप को जन्म दिया तो वहां उपस्थित सभी देवजन घबरा गए. जब भैरव रूप ने ब्रह्मा जी का एक सिर काट दिया तभी से भैरवजी पर ब्रह्महत्या का पाप आ गया. ब्रह्माजी ने भैरव बाबा से माफी मांगी तब जाकर शिवजी अपने असली रूप में आए. भैरव बाबा को उनके पापों के कारण दंड मिला इसीलिए भैरव को कई दिनों तक भिखारी की तरह रहना पड़ा. इस प्रकार कई वर्षों बाद वाराणसी में इनका दंड समाप्त होता है. इसका एक नाम ‘दंडपाणी’ पड़ा था.

बाबा भैरव की पूजा का महत्व

  1. काल भैरव को तंत्र-मंत्र का देवता कहा जाता है. बाबा के आशीर्वाद से नकारात्मक शक्तियां की हानि होती है.
  2. काल भैरव की पूजा करने से असाध्य रोग समाप्त होते हैं.
  3. बाबा की कृपा से अकाल मृत्यु का भय दूर होता है.
  4. भैरवनाथ की पूजा करने से ग्रह दोष टल जाते हैं.
  5. बाबा के आशीर्वाद से शत्रु पास आने में घबराते हैं.

Tags: Astrology, Dharma Aastha, Religious

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Up Head Line
Author: Up Head Line

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